बॉलीवुड के लिए २०१५ एक शाकाहारी थाली की तरह रहा, कुछ खट्टा, कुछ मीठा तो कुछ तीखा कुछ आपकी पसंद का होता है कुछ ना पसंद का, पसंद का व्यंजन जितना मिले कम ही लगता हैजिस तरह साल के शुरुआत से ही हर भारतीय को अच्छे दिन” का इंतज़ार था उसी तरह दर्शको को अच्छी फिल्म का इंतज़ार थापर हर दर्शक के लिए अच्छी फिल्म की परिभाषा अलग होती हैकिसी के लिए ‘बजरंगी भाईजान’ साल की सर्वश्रेष्ठ फिल्म थी तो किसी के लिए ‘तलवार’किसी के लिए ‘बाजीराव मस्तानी’ तो किसी केa लिए ‘मसान’. 
 
हम अपनी ज़र से इस वर्ष को देखने की कोशिश करते है.
 
जनवरी
January

वर्ष के पहले महीने में लगभग १४ हिंदी फिल्में सिनेमा के परदे पर देखने को मिलीजिनमें से बेबीतेवरक्रेजी कुकड फॅमिलीडॉली की डोलीहवएजादा,अलोन  ने खास कर दर्शको का ध्यान खीचालेकिन दर्शको ने सिर्फ बेबी को पसंद कियाकिसी को परवाह नहीं थी की सोनम यानी डॉली की डोली कौन ले के जायेगा. विभु पूरी संजय लीला भंसाली के प्रोडक्शन में चेनाब गाँधी नामक फिल्म निर्देशित करने वाले थेवो फिल्म तो नहीं बन पाई लेकिन जो उन्होंने बनाई(हवएजादावो काफी निराशाजनक रही. यह कहानी सत्य कथा पर आधारित थी लेकिन फिल्म को एक परी-कथा की तरह बनाया गया जिसे देखने कोई नहीं गया.इस महीने की छुपा रुस्तम फिल्म रही ‘रहस्य’मनीष गुप्ता के निर्देशन में बनी यह फिल्म, कम लागत में बनी अच्छी फिल्म थी. दर्शको ने इसे सराहा और ये  फिल्म मनीष गुप्ता की अब तक की सबसे बेहतर फिल्म  बन कर उभरी , गौरतलब हो की रामगोपाल वर्मा की सरकार के लेखक, मनीष गुप्ता इस से पहले स्टोनमेन मरडर्ज़ और हॉस्टल बना चुके है.
 
फरवरी
February
इस महीने जहा राजनीति में अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली इलेक्शन में ६७ सीट लेकर सब को चौका दिया वही शरद कटारिया की निर्देशित फिल्म दम लगा के हैषा  भी एक खूबसूरत सरप्राइज रहीकई दिनों बाद एक हृषिकेश मुझेर्जी की फिल्मो जैसी सुगंघ  इस फिल्म में देखने को मिली. इसी दिन रिलीज़ हुई फिल्म अब तक छप्पन उम्मीद पे खरी नहीं उतरी.   जहा शमितःभ ने निराश किया वही बदलापुर बॉक्स ऑफिस पर काफी चलीवरुण धवन और नवाज़ुद्दीन ने इस फिल्म में बेहतरीन अदाकारी कीसिनेमा घर से निकलने के बाद आप वाकई सोचते हो की जीवन में दूसरा मौका सब को मिलना चाहिएरॉय का संगीत बहुत पसंद किया गया पर फिल्म लोगो की समझ से बहार थी. एम स जी “मेसेंजर ऑफ़ गॉड” का कई जगह विरोध हुआतो कई शहरों में बगुलाभगतो ने फिल्म को खूब देखा
लम्बे इंतज़ार के बाद आई फिल्म किस्सा भी रिलीज़ हुई समीक्षकों ने फिल्म की बहुत सराहना की.
 
मार्च
march-002
मार्च में भारत के पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और स्वतंत्र सेनानी मदन मोहन मालवीय को भारत रतन दिया गयावही सिनेमा घर के पास कुछ खास नहीं था दर्शको को दे ने के लिएदेश में क्रिकेट वर्ल्ड कप की धूम मची हुईवही अनुष्का ने NH १० में उम्दा प्रदर्शन दियाफिल्म दर्शको को अन्दर तक परेशां करती है दर्शक अपने आप को उस उसी स्थिति में फसा महसूस करते है आप को अपने ही देश का एक दूसरा रूप देखने को मिलता हैऔर समझ में आता है कि क्यों इस देश में अनुष्का शर्मा को क्रिकेट वर्ल्ड कप में विराट कोहली के बुरे प्रदर्शन के लिए जिम्मेवार माना जाता हैकई लोग सिनेमा को समाज का आइना कहते है और यह फिल्म वाकई हमे हमारे समाज का  आइना दिखाती है.
 
अप्रैल
April
अप्रैल का महीने में कुकिंग गैस के बहिष्कार की तरह दर्शकों ने सिनेमा का भी बहिष्कार सा किया, जहां एक और दिबाकर बनर्जी की ब्योमकेश बक्षी की दुर्गति हुई वही मराठी फिल्म कोर्ट को दर्शकों ने  सराहा. ये फिल्म भारत से ऑस्कर अवार्ड के लिए भेजी गई, पर अवार्ड की रेस से बाहर कर दी गई. छोटी छोटी कई फिल्में बड़ा असर दिखा गईं जहां बड़ी बड़ी फिल्मों की धुल चाटनी पड़ी. कागज़ के फूल्स, इमरान हाशमी की मिस्टर एक्स और सनी लियॉन की एक पहेली लीला पहेली बन कर रह गई . कल्कि की  मार्गरीता विथ अ स्ट्रा काफी पसंद की गई . मज़े की बात तो ये है की एक बड़े प्रोडूसर CEO ने मार्गरीता की तारीफ तो की, पर ये भी कहा की वे ऐसी फिल्में कभी नहीं बनाएँगे,और  पॉपकॉर्न खाते हुए देखना ही पसंद करेंगे.
 
मई 
May
ये महिना महिलाओं के नाम था, जहां एक तरफ सानिया मिर्ज़ा ने अपने डबल्स खिताब को धर दबोचा वहीँ कंगना रानौत ने तनु वेड्स मनु की दूसरी किश्त में डबल रोल में जान फूँक दी. काफी दिनों बाद कोई फिल्म अपने पेर्फोर्मंसस के बलबूते बड़े बजट की फिल्म को धोबी पछाड़ देती हुई नज़र आई, जी हाँ हम इसी महीने रिलीज़ हुई बॉम्बे वेलवेट की बात कर रहे हैं. अनुराग कश्यप, करण जोहर, रणबीर कपूर और अनुष्का शर्मा अपने ही बॉम्बे वेलवेट की कालीन  में लिपटा कर सिनेमा हाल से बाहर कर दिए गए. गब्बर भी ठीक ठाक ही चली. ऐसे में दीपिका,अमिताभ द्वारा अभिनीत पिकू ने दर्शकों को खूब लुभाया और साबित किया की अच्छी स्क्रिप्ट पे बनी फिल्म चाहे कांस्तिपेशन पे ही क्यों न हो, दर्शक पा ही जाएगी. कंगना और दीपिका ने एक ही महीने में दो जानदार फिल्मों से अपने अपने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के खिताबों की दावेदारी दे डाली.
 
जून
June

जोया अख्तर इस महीने लेकर आई दिल धडकने दो, ये फिल्म अलग तो थी पर एक सीमित दर्शकवर्ग के कारण ये फिल्म भी जल्द ही बॉक्स ऑफिस पर अलग थलग पड़ गई. फिल्म किसी तरह हिट तो हो गई पर अपने स्टार पावर को भुना नहीं पायी. इसी महीने आई विद्या-इमरान की ‘हमारी अधूरी कहानी‘, जो की ठोस कहानी के न होने के कारण चल बसी. फिल्म के संगीत ने श्रोताओं को खूब रिझाया पर फिल्म कोई कमाल नहीं कर पाई. इस महीने की १०० करोड़ फिल्म थीABCD-२. वरुण और श्रद्धा के लिए ये एक तोहफे की तरह आई. लोगों ने इसको खूब पसंद किया. ‘मिस टनकपुर हाज़िर हो‘, मीडिया के प्रचार के बावजूद कोई कमाल नहीं दिखा सकी.
जुलाई
July
ये महीना भारतवासियों के लिए दुःख और ख़ुशी दोनों का मिश्रण था. जहां एक ओर माननीय अब्दुल कलाम जी गुज़र गए वहीँ दूसरी ओर याकूब मनों की फांसीसे देश दो भागों में बाँट गया. फिल्म इंडस्ट्री भी इस महीने बॉलीवुड और टोलीवुड में दो फाड़ हो गई, एक तरफ थी बाहुबली और दूसरी तरफ बजरंगी भाईजान. बाहुबली इस महीने की बाहुबली बन कर प्रकट हुई. किसी ने नहीं सोचा होगा की धर्मा प्रोडक्शन अपने साल के नुकसानों को इसके सहारे पूरा कर डालेंगे, वही बात हुई “न हींग लगी न फिटकरी, रंग भी चोखा..”. फिर आई इस साल की सबसे बड़ी ब्लोकबस्टर फिल्म बजरंगी भाईजान. सलमान खान अपनी इमेज से हटकर इस फिल्म में नज़र आये. न उन्होंने कपडे उतारे न ही धुआंधार स्टंट किये, फिर भी हिन्दुस्तान और पकिस्तान में इस फिल्म ने धुआंधार कारोबार किया. फिल्म की टीम को बेहद सराहा गया और बाहुबली के बावजूद दोनों फिल्मो ने दर्शकों को खूब रिझाया.फस गए रे ओबामा और जॉली एल एल बी जैसे फिल्में देने के बाद सुभाष कपूर ने गुड्डू रंगीला से दर्शकों को निराश किया. जहां एक तरह कंगना की इमेज को भुनाने के लिए रिलीज़ की गई डब्बाबंद फिल्म आई लव न्यूयॉर्क को दर्शकों ने वापस डब्बा बंद कर दिया. तेलेगु फिल्म दृश्यम का हिंदी प्रारूप भी लोगों को काफी पसंद आया.मसान को कांस में खूब वाहवाही मिली. इस साल की सबसे अच्छी फिल्मों में मसान का शुमार हो गया. विक्की कौशल इस साल की खोज माने जा रहे हैं , वहीँ वरुण ग्रोवर का नाम सर्वश्रेष्ठ लेखकों में शामिल हो गया है.
अगस्त
August
अगस्त में फिल्मों की बमबारी सी हुई, एक के बाद एक फिल्में आती रहीं और बॉक्स ऑफिस पर धराशाई होती रहीं, इनमें से सबसे ज्यादा नुक्सान हुआ अक्षय कुमार और सिद्धार्थ मल्होत्र् की ब्रदर्स को. ये फिल्म धर्मा कैंप पर एक मुसीबत की तरह आई. न ही अक्षय का एक्शन काम आया न ही सिद्धार्थ के डोले. इसी तरह बेंगिस्तान, फैंटम, आल इज वेल भी फ्लॉप रहीं. मांझी को थोड़ी बहुत सराहना मिली वो भी शायद इसलिए , क्योंकि अभिनय और कहानी में सच्चाई थी . नवाज़ ने बदलापुर के बाद फिर साबित किया की वो एक पूरी फिल्म अपने कंधे पर ले कर चल सकते हैं.
सितम्बर 
September
सितम्बर के महीने में , कपिल शर्मा की किस किस को प्यार करू,  वेल्काम बेक ने थोड़ी राहत दी. कट्टी बट्टी ठीक ठाक चली जिसको देख कर आमिर खान फिर से रो दिए, क्यों? ये अभी पता चलना बाकी है  वहीँ मेराठिया गंगस्टर, मेसेंजर ऑफ़ गॉड -२ (जी हाँ, एक ही साल में दो हिमाकत ), सालों से लटकी भाग जोनी भाग और मधुर भंडारकर की एक और टिपिकल कैलेंडर गर्ल्ज़ और खुद सलमान द्वारा प्रमोटेड हीरो बॉक्स ऑफिस पर औंधे मूह गिर पड़ी. जिया खान केस ने हीरो को विलेन बना ही दिया. इसी महीने में हमने आदेश श्रीवास्तव को खो दिया.
ऑक्टोबर
October
महीने की शुरुआत में संगीतकार रविन्द्र जैन का निधन हो गया. राजश्री और आर  के बैनर्स के स्टार संगीतज्ञ रविन्द्र जैन अपनी मधुर धुनों को हमारे बीच छोड़ कर हमेश के लिए चले गए.जनवरी की तरह इस महीने भी लगभग १४ फिल्मी रिलीज़ हुई. फिल्म क्वीन के बाद निर्देशक विकास बहेल की शानदार का लोगो को बेसब्री से इंतज़ार थापर शानदार देखने के बाद दर्शको को इस बात पे ही शक हुआ की क्या वाकई  विकास बहेल ने ही क्वीन निर्देशित की थी. जहा देश में अवार्ड वापिसी का दौर था वही  फिल्म जज्बा से ऐश्वर्याराय बच्चन ने सिनेमा घर पे वापिसी कीफिल्म दर्शको को कुछ ख़ास नहीं लगीदूसरी और बहुत कम सिनेमा घरो में रिलीज़ होने के बावजूद फिल्म तलवार को लोगो ने खूब देखाअरुशी हत्या कांड पे बनी यह फिल्म लोगो को सोचने पर मजबूर कर देती हैफिल्म  भारत के राष्ट्रपति द्वारा भी देखी गयीजब भी वास्तविक घटनाओ पर आधारित फिल्मो की बात होगी तो तलवार का नाम जरुर आयेगा. मेघना गुलज़ार और विशाल भरद्वाज की  जितनी प्रसंशा की जाये कम हैइसके अलवा प्यार का पंचनामा -२  को युवा दर्शको के खूब पसंद किया कार्तिक आर्यन को मोनोलोग मैन का तमगा मिला और उनके इस मोनोलोग को सोशल मीडिया पे खूब देखा गयाइसके अलावा सिंह इस ब्लिंग को उसके दर्शक मिल गएमें और चार्ली से किसी को उम्मीद नहीं थी पर फिल्म अच्छी थी और माउथ पब्लिसिटी से बॉक्स ऑफिस पे चलीयशराज की फिल्म तितली को कई महीनों से सिनेमा का इंतज़ार थालेकिन फिल्म दर्शको को सिनेमा घर में खीचने में नाकामयाब रही, पर समीक्षकों की वाह वाही खूब लूटी.
 
नवम्बर
Salman Khan in Prem Ratan Dhan Payo
इस महीने वापिसी हुई सूरज बडजात्या और सलमान खान की जोड़ी की, फिल्म थी प्रेम रतन धन पायो .उम्मीद की जा रही थी की यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सब रिकॉर्ड तोड़ देगीदिवाली की छुट्यो की वजह से लोग फिल्म को देखने गए लेकिन फिल्म ने उम्मीद से कम कारोबार  कियासोलाह दिनों के लम्बे अंतरालके बाद रिलीज़ हुई इम्तियाज़ अली की तमाशातमाशा ने एक बार फिर साबित किया की रणबीर कपूर अपनी पीढ़ी के सबसे बेहतरीन अभिनेता हैफिल्म बहुत दिलचस्प थी और इम्तियाज़ का यह सूफियाना इश्क लोगो को भी पसंद आया, पर  फिर भी फिल्म उम्मीद से कम चली.
 
दिसम्बर
Deecember
मधुरीता आनंद की फिल्म कजरिया  की रिलीज़ से महीने की शुरुआत हुईइस फिल्म का प्रीमियर दुबई फिल्म फेस्टिवल में हुआ थाइस फिल्म को कई और कई जाने माने फेस्टिवलस में देखाया गयाफिल्म की बहुत प्रशंसा भी हुई लेकिन कम पब्लिसिटी के कारण भारत में इस फिल्म को लेके इतना रुझान नहीं रहाइसी महीने वर्ष की दो सबसे बड़ी फिल्मे दिलवाले और बाजीराव मस्तानी एक ही दिन रिलीज़ हुईजहा दिलवाले ने शाहरुख़, काजोल और रोहित शेट्टी की तिकड़ी होने के बावजूद निराश किया वही संजय लीला भंसाली के १२ साल के परिश्रम ने दर्शको का दिल जीत लिया. संजय लीला भंसाली ने फिर साबित किया की जब भी भारतीय सिनेमा की बात होगी तो उनका ज़िक्र हमेशा किया जायेगाउनका जुनून उनकी  फिल्म के एक एक फ्रेम में दिखता है.
 
साल के अंत में साधना जी हमारा साथ छोड़ गईं. सिने प्रेमियों ने उन्हें अपने दिल में रखते हुए ,गीली आँखों से विदा किया.
 
हर साल का पहला हफ्ता , बॉलीवुड के लिए किसी अपशकुन से कम नहीं माना जाता, सालों से रीति रही है की इस हफ्ते में कोई बड़ी फिल्म रिलीज़ नहीं होती. अगले साल के दुसरे हफ्ते में आ रही हैं दो एक दम अलग फिल्में, विधु विनोद चोपड़ा की वजीर और ओनिर की चौरंगा. इन दोनों फिल्मों से होगा अगले साल के फिल्म महाभोज की शुरवात. आने वाले साल में जिन फिल्मो का इंतज़ार सब को है वो है अभिषेक कपूर की फितूरअनिल कपूर के बेटे की पहली फिल्म मिर्ज्या, जो की पूंजाबी प्रेमकथा मिर्ज़ा साहिबा का प्रतिरूप है अभिषेक चोबे की उडता पंजाबशाहरूख खान अभिनीत फैन और रईसआशुतोष गोवारिकर  की मोहन जोदारोविशाल भरद्वाज की रंगूनआमिर खान अभिनीत दंगल और कारन जोहर की ऐ दिल है मुश्किल.
हाल ही में कारन जोहर की सालों से सपना बनी हुई फिल्म शुद्दी बंद कर दी गयीजग्गा जासूस का कोई अता पता नहीं कब आयेगीफिल्म पानी की शूटिंग इस साल भी नहीं शुरू हुई. उम्मीद है की ये सब फिल्में भी अपना दीदार ज़रूर दें, आखिर उम्मीद पे ही दुनिया कायम है.
 
उम्मीद करते है आने वाला साल बॉलीवुड के लिए शानदार रहे
Ajay Sharma

Ajay Sharma

Editor. Writer. Story teller. Film Enthusiast. Love smiling faces and hence trying to make others smile.
Ajay Sharma

Latest posts by Ajay Sharma (see all)

Comments