#Scriptors100BestFilms #TereGharKeSaamne

50 के दशक में रोमांटिक कॉमेडी फिल्मों के दौर की शुरुआत हुई जो वर्तमान में फिल्म निर्माण की सबसे लोकप्रिय शैली है देवानंद व नूतन की जोड़ी ने पूर्व में पेइंग गेस्ट जैसी सफल रोमांटिक कॉमेडी फिल्म की । इसी जोड़ी की वर्ष १९६३ में तेरे घर के सामने फिल्म आई । जो अत्यन्त सफल व लोकप्रिय फिल्म साबित हुई । इस फिल्म से रोमांस व हास्य के साथ एक सामाजिक सन्देश देने का सफल प्रयास किया गया जो आज निर्देशक राजकुमार हिरानी की सफलता का अचूक फार्मूला है!

फिल्म के दो प्रमुख पात्र लाला जगन्नाथ (ओम प्रकाश )व सेठ करमचंद (हरिंद्र नाथ चटोपाध्याय )धनी बिजनेसमैन हैं जो हर चीज़ में एक दुसरे के प्रतिद्वंदी हैं व एक दुसरे को नीचा दिखने का कोई मौका नहीं छोड़ते । फिल्म के पहले शॉट में ही इन दोनों के चरित्र व प्रतिद्वंदिता को खूबसूरती से दर्शाया गया है जहाँ सरकारी नीलामी में दोनों फ्रंट प्लाट के लिए बढ़ चढ़ कर’बोली लगते हैं अंततः लाला जगन्नाथ फ्रंट प्लाट प्राप्त करने में सफल होते हैं लेकिन वहीँ हरिंद्र नाथ बैक प्लाट को एक अनावश्यक बोली लगाकर ! अब प्रतिद्वंदिता शुरू होती है की किसका मकान दुसरे के मकान से बेहतर बनता है | सेठ करमचंद अपनी बेटी सुलेखा (नूतन) के माध्यम से एक आर्किटेक्ट राकेश (देव आनंद ) को मकान बनवाने के लिए अनुबंधित करते है लेकिन वह ये नहीं जानते की राकेश लाला जगन्नाथ का बेटा है | जबकि राकेश ये जानते हुए भी अनुबंध स्वीकार करता है | इन सबके बीच धीरे धीरे राकेश व सुलेखा के मध्य प्यार पनपने लगता है| मज़े की बात यह होती है की दोनों ही परिवार अपना मकान बनवाने के लिए एक ही डिज़ाइन को पसंद करते है व राकेश को उसी डिज़ाइन का मकान बनने के लिए मजबूर करते हैं इन परिस्थितियों में उत्पन्न स्वाभाविक हास्य को निर्देशक ने कुशलता पूर्वक फिल्माया है जबकि राकेश व सुलेख बीच के रोमांस को भी उतनी ही स्वाभाविकता व कुशलता से कहानी में पिरोया गया है| अंततः राकेश को सच्चाई बताने के लिए बाध्य होना पड़ता है। दोनों परिवारों की दुश्मनी अपने बच्चों के प्यार के आगे धीरे धीरे टूट जाती है और दोनों मकानों के उद्घाटन के दिन ही राकेश व सुलेखा की शादी हो जाती है!

निर्देशक विजय आनंद इससे पहले फिल्म नौ दो ग्यारह व काला बाजार का निर्देशन कर चुके थे। लेकिन इस फिल्म से उन्होंने अपनी उस क्षमता का प्रदर्शन किया जो बाद में उनके द्वारा प्रदर्शित फिल्मों “गाइड” “ज्वेल थीफ” व “जोनी मेरा नाम” में अपनी पूरी पराकाष्ठा में दिखी| इस फिल्म की दोनों विधाओं हास्य व रोमांस को निर्देशक ने अपनी कुशलता से एक स्वाभाविकता एवं सम्पूर्णता प्रदान की है।फिल्म के गीत व सचिन देव बर्मन का संगीत फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण है। फिल्म के अत्यन्त लोकप्रिय व सर्वकालिक सदाबहार गीत हैं जिनके फिल्मांकन में एक रूमानी नयापन दिखलाई देता है जो निर्देशक विजयानंद की एक विशेषता रही है। इस पर देव आनंद की रोमांटिक अदाओं व नूतन की अल्हड़ता ने दशकों को मंत्रमुग्ध किया है| दिल का भंवर करे पुकार गीत क़ुतुब मीनार में फिल्माया गया था. गीत से पहले सुलेखा और राकेश क़ुतुब मीनार की ऊंचाई पर पहुंचते है और वहाँ तक आते आते उन्हें प्यार हो जाता है। राकेश कहता है यहाँ से ऊपर तोह अब सिर्फ दो ही ताकतें ले जा सकती है – खुदा या प्यार ! नीचे उतारते समय गीत शुरू होता है जो की उनके प्रेम की शुरुआत है.

कुल मिलाकर तेरे घर के सामने एक हलकी फुल्की रोमांटिक कॉमेडी फिल्म है जो दर्शकों को बांध कर रखती है व अपने रोमांटिक गीतों व सचिनदा के विस्मरणीय संगीत तथा गानों के अद्भुद फिल्मांकन के कारण सर्वकालिक महान फिल्मों की श्रेणी में आती है|

Prakash Khare

Prakash Khare

Retired Government Officer, Big Time Indian Cinema Fan, Old Film Encyclopedia
Prakash Khare

Latest posts by Prakash Khare (see all)

Comments