#HappyFriendshipDay

 

आज फ्रेंडशिप डे है यानी दोस्ती का दिन, वो दिन जिस दिन आप अपने हर एक दोस्त को याद करके वो पल ज़रूर याद करते हैं. आपने अपने चहेते दोस्तों के साथ बिताये पल शायद किसी न किसी फिल्म में ज़रूर देखे होंगे क्योंकि बॉलीवुड ने दोस्ती के रिश्ते को हमेशा से ही तरजीह दी है, दोस्तों की अनोखी कहानियां में हमको अपने प्यारे दोस्तों का अक्स दिखाया है, मुन्नाभाई – सर्किट हो या रेंचो, राजू ,फरहान, हर एक किरदार में आपको अपना कोई ख़ास दोस्त्र ज़रूर दिखाई देगा. दोस्ती के जज्बे को सलाम करते हुए आज हम आपके लिए लेकर आये हैं, दोस्ती के रंग में रंगे हुए कुछ गीत, साथ ही करते हैं बातें कुछ मेरी पसंदीदा कुछ ऐसी फिल्मों की जिनको दोस्तों के साथ देखने की बात ही कुछ और है.

दोस्ती – मेरी दोस्ती मेरा प्यार

रामू और मोहन की दोस्तीं की ये कहानी बॉलीवुड की सबसे अनूठी कहानी है, आखों से अँधा मोहन अपने अपाहिज दोस्त रामू को पढ़ाने के लिए हर कोशिश करता है, उसके लिए रामू की पढ़ाई का सपना उसकी अपनी जान से बढ़ कर बन जाता है. उसकी दोस्ती में जो प्यार छुपा है वो किसी भी प्रेमकथा से बड़ा और महान बन जाता है. रामू और मोहन की ये कहानी आपको रुलाने का माद्दा रखती है, और दोस्ती को प्यार से ऊँचे दर्जे पर पहुंचा देती है. हम सबकी ज़िन्दगी में एक ऐसा दोस्त ज़रूर होता है जिसका हर कदम ‘दोस्ती’ की राह में होता है, ये फिल्म हमको सिखाती है की दोस्ती और सच्चे प्यार में ज्यादा फर्क नहीं है, जहां प्यार नहीं है वहाँ दोस्ती पनप ही नहीं सकती.

दिल चाहता है – हम न रहे कभी यारों के बिन

जब भी दोस्ती की बात आती है तो दिल चाहता है अपने आप ही आपकी आँखों के सामने आ ही जाती होगी,आकाश, समीर और सिद्धार्थ की दोस्ती फिल्म दिल चाहता है का सबसे बड़ा हिस्सा है, हालांकि की तीनों दोस्तों की अपनी अपनी कहानियां हैं पर दोस्ती इस फिल्म का सबसे ख़ास हिस्सा बन जाती है. याद है वो गीत जहाँ हम देखते हैं ,गोवा की तरफ चलते हुए तीन बिलकुल अलग अलग किस्म के इंसान जो दोस्ती की डोर से बंधे हुए हैं. फिल्म की शुरवात और फिल्म का अंत दोस्ती पर ही होता है, दोस्तों के बिछड़ने का ग़म आपको फिल्म के किरदारों में महसूस होता है. मेरी नज़र में, दोस्ती पर बनी फिल्मों में दिल चाहता है बेहद शानदार फिल्म है और हम में से ज़्यादातर दोस्तों की पसंदीदा फिल्म भी है.

https://youtu.be/d7xQRcnoGtY?t=3

मुन्ना भाई एम् बी बी एस – हर दोस्त के लिए है जादू की झप्पी

मुन्ना और सर्किट का मतलब ही है, ऐसी दोस्ती जिसमें दोस्त के लिए कुछ भी किया जा सकता है, दोनों एक दुसरे के एक इशारे पर कुछ भी कर सकते हैं. फिल्म यूनिवर्सल तौर पर दोस्ती की बात करती है, और कहती है की हर दोस्त के लिए जादू की झप्पी है और जादू की झप्पी से किसी को भी दोस्त बनाया जा सकता है. आज आपने किसको दी है जादू की झप्पी?

३ इडियट्स – आल इज वेल

ये फिल्म हमको सिखाती है, की जब तक ज़िन्दगी में दोस्त हैं तब तक ‘आल इज वेल’.तीन दोस्त कॉलेज में मिलते हैं, और इतने गहरे दोस्त बन जाते हैं, की जब उनका दोस्त गायब हो जाता है, तो बाकी बचे दो दोस्तों की पूरी ज़िन्दगी अपने दोस्त के बारे में पता लगाने में बीत जाती है.

शोले – ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे

जय वीरू का मतलब ही है दोस्ती , फिल्म का एक गीत कहता है “लोगों को आते हैं, हम नज़र दो मगर,  देखो दो नहीं”. दोस्ती की इससे बड़ी मिसाल कोई नहीं. जय वीरू दो जिस्म और एक जान बन कर ज़िन्दगी जीते हैं. दोस्ती ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सहारा है, जो अपने दोस्त के लिए मर नहीं सकता वो किसी के लिए भी जी नहीं सकता. जय अपने दोस्त को बचाने के लिए अपनी मौत को भी चुनने से नहीं हिचकिचाता, इससे बड़ी मिसाल और कहाँ मिलेगी

मैंने प्यार किया – दोस्ती की है, निभानी तो पड़ेगी

प्यार का पहला पड़ाव ही दोस्ती है, इस बात को मैंने प्यार किया से बेहतर शायद ही किसी फिल्म ने दिखाया है, मेरी नज़र में मैंने प्यार किया प्यार से ज्यादा दोस्ती की कहानी है. फिल्म में कई जगह पर दोस्ती के कई रंग दिखाए गए हैं, चाहे वो करण और किशन की दोस्ती हो, सुमन और प्रेम की दोस्ती हो, मनोहर और प्रेम की दोस्ती हो या सुमन और मनोहर की दोस्ती हो. हर किसी की दोस्ती की कहानी शानदार है. हम सबकी ज़िन्दगी में इन जैसा एक दोस्त ज़रूर होगा इसी लिए मैंने प्यार किया से आप प्यार करना सीख पाएं या न सीख पाएं दोस्ती निभाना ज़रूर सीख जाएंगे.

याराना – याद करेगी दुनिया, तेरा मेरा अफसाना

किशन और बिशन की ये कहानी यार पे जान निसार कर देने की एक और कहानी है जो की मेरी सबसे पसंदीदा फिल्मों में से एक है, इस फिल्म में दोस्ती की गहरी छाप साफ़ साफ़ दिखती है. बिशन अपने दोस्त किशन की ज़िन्दगी संवारने के लिए क्या कुछ नहीं कर जाता. ये फिल्म भी फिल्म दोस्ती की तरह ये सिखाती है की दोस्त के लिए जो भी किया जाए वो थोडा ही है. दोस्त अगर सच्चा है, वो अपने दोस्त के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, चाहे उसके लिए उसे कुछ भी करना पड़े.

आनंद – मैंने तेरे लिए ही सात रंग के सपने चुने

ये फिल्म दोस्ती को भगवान से ऊपर का दर्जा देती है, ऐसा मेरा मानना है.  दुनिया में बाकी सभी रिश्ते आपको बने बनाए मिलते हैं, कुछ रिश्ते आसमानी होते हैं. बस एक रिश्ता ही ऐसा है जो इंसान यहीं आकर बनाता है और वो है दोस्ती का रिश्ता. आनंद एक ऐसा किरदार है, जो इस बात को साबित करता है, की दुनिया में दोस्त से बढ़कर कोई रिश्ता नहीं है. आनंद को दोस्त बड़े प्यारे थे, और ये उसकी दोस्ती ही थी जिसने उसके इर्द गिर्द जी रहे, या यूँ कहूँ मर रहे हर किसी को जिंदा कर दिया. कभी कभी सोचता हूँ की काश हममे से हर कोई आनद की तरह जीना सीख ले, तो वो जीते हुए कभी मरेगा नहीं और  मरते वक़्त कभी अकेला नहीं होगा. मरने के बाद भी वो अपने हर दोस्त की आत्मा में हमेशा जिंदा रहेगा.

 

Yohaann Bhaargava
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Yohaann Bhaargava

Head - Business Development at SCRIPTORS
Movie Buff. Yohaann is a film critic with Jagran Prakashan Limited. He has been associated with Print and TV media as a branding professional. Presently he is a screenwriter trying to bring in some good scripts up for Bollywood. At Scriptors he works as a writer and handles business development.
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